दिल्ली,03 अप्रैल : अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया, जो पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह बिल व्यापक चर्चा और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की सिफारिशों के आधार पर लाया गया है।
रिजिजू ने कहा, “अब वक्फ किसी संपत्ति पर सीधे कब्जा नहीं कर सकेगा।” संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। खासकर आदिवासी इलाकों में वक्फ बोर्ड की दखलअंदाजी पर रोक लगाई गई है।
राइट टू अपील का प्रावधान
बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल का कार्यकाल पांच साल तय किया गया है। पहले यूपीए सरकार के नियमों के तहत, ट्रिब्यूनल में सुनवाई नहीं होने पर सीधे कोर्ट जाने की अनुमति नहीं थी, केवल रिव्यू पिटीशन का विकल्प था। अब सरकार ने राइट टू अपील का प्रावधान जोड़ा है, जिससे लोग जल्द न्याय पा सकेंगे।
इसके अलावा, बोर्ड को मिलने वाले सालाना फंड को 7% से घटाकर 5% किया गया है ताकि यह पैसा कल्याणकारी योजनाओं में खर्च हो सके। साथ ही, लिमिटेशन एक्ट लागू कर प्राइवेट जमीन पर 12 साल और सरकारी जमीन पर 13 साल की सीमा तय कर दी गई है।