चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जिनका नाम तपस्या और ब्रह्म के आचरण से जुड़ा हुआ है। मां ब्रह्मचारिणी को ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है, और उनका रूप अत्यधिक तेज से भरपूर होता है। पूजा में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में हर कार्य में सफलता मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर हुआ था। उन्होंने भगवान शिव को अपने पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। एक हजार वर्षों तक मां ने केवल फल-फूल खाकर तपस्या की, और सौ वर्षों तक केवल शाक खाकर निर्जल व्रत किया। उनकी कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया था, लेकिन उनकी शक्ति और समर्पण अनंत थे।
कई वर्षों तक कठिन साधना के बाद, ब्रह्माजी ने आकाशवाणी की और कहा कि देवी की तपस्या को देखकर समस्त लोकों में हर्ष है। उन्होंने कहा कि देवी की मनोकामना शीघ्र पूरी होगी और उन्हें भगवान शिव का वरदान मिलेगा। अंततः मां ब्रह्मचारिणी का विवाह महादेव शिव से हुआ, और उनका तप सफल हुआ।
नवरात्रि के इस दिन पूजा और व्रत से जीवन में हर प्रकार की सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।