चंडीगढ़/संगरूर: केंद्र सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच सातवें दौर की वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पीयूष गोयल, और प्रह्लाद जोशी ने किसानों से बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इस बीच, वार्ता के बाद लौट रहे किसान नेताओं जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवण सिंह पंधेर को पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
किसान नेताओं की गिरफ्तारी से माहौल गर्माया
किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के संयोजक सरवण पंधेर को मोहाली एयरपोर्ट रोड पर पुलिस ने घेर लिया, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत डल्लेवाल को संगरूर में एंबुलेंस समेत हिरासत में ले लिया गया। इसके अलावा, काका सिंह कोटड़ा, अभिमन्यु कोहाड़, मनजीत राय और ओंकार सिंह को भी पुलिस ने डिटेन कर लिया।
इस कार्रवाई के बाद संगरूर में किसानों और पुलिस के बीच झड़पें देखने को मिलीं। किसानों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, लेकिन भारी सुरक्षा बल की तैनाती के चलते कई किसानों को हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस पर जबरन बॉर्डर खाली कराने का आरोप
किसान संगठनों को आशंका है कि पुलिस अब शंभू और खनौरी बॉर्डर को जबरन खाली करवा सकती है। इसको देखते हुए किसानों को भारी संख्या में बॉर्डर पर इकट्ठा होने का निर्देश दिया गया है। उधर, हरियाणा सरकार ने भी खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी है और पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी गई है।
13 महीने से बॉर्डर पर डटे किसान, MSP की गारंटी की मांग
गौरतलब है कि किसान 13 फरवरी 2024 से शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। वे MSP की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते थे, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें बॉर्डर पर ही रोक दिया। तब से लेकर अब तक किसान चार बार दिल्ली कूच की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें रोक दिया गया।
पंजाब सरकार का बयान – ‘हम किसानों के साथ, लेकिन हाईवे बंद होने से नुकसान’
पंजाब सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसानों के साथ खड़ी है, लेकिन हाईवे बंद होने से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सोंड ने कहा:
“पंजाब की सरकार हमेशा किसानों के समर्थन में रही है।”
“लेकिन हाईवे बंद होने से व्यापार और रोजगार पर असर पड़ रहा है।”
“हम समाधान चाहते हैं, ताकि किसानों को भी न्याय मिले और पंजाब को भी आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।”
आगे क्या? आंदोलन और तेज होने की संभावना
किसानों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं और पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। अगले कुछ दिनों में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में सरकार और किसान संगठनों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।