दिल्ली,18 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में मंगलवार को महाकुंभ के आयोजन को ऐतिहासिक और राष्ट्र के जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आयोजन विविधता में एकता की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में सभी मतभेद मिट गए और यह साबित हुआ कि एकता की भावना भारत में गहरे स्तर पर समाई हुई है। पीएम मोदी ने इस आयोजन को देश की सबसे बड़ी ताकत के रूप में देखा, खासकर जब दुनिया चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रही है।
जल संरक्षण पर दिया जोर पीएम मोदी ने महाकुंभ से प्रेरित होकर जल संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में कई नदियां हैं, जिनमें से कुछ खतरे में हैं, और इस दिशा में नदी उत्सव जैसे आयोजनों की आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी को जल संरक्षण का महत्व समझाया जा सके। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन को भारत की शक्ति और क्षमता के प्रदर्शक के रूप में पेश किया और कहा कि इसने देशवासियों को प्रेरणा दी है।
राहुल गांधी का जवाब प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने संसद में हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान जिन लोगों की मौत हुई, उस पर प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं कहा। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि पीएम को यह भी बताना चाहिए था कि महाकुंभ के दौरान कितने युवकों को रोजगार मिला। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यही नया भारत है, जिसमें विपक्ष को बोलने का अधिकार नहीं है।
संसद में हंगामा प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया और पूछा कि किस नियम के तहत पीएम को बोलने की अनुमति दी गई। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को सदन में बयान देने का अधिकार है। हंगामा बढ़ने के बाद, अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो विपक्ष ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के जवाब के दौरान भी शोर मचाया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।