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हरियाणा में कांग्रेस ने फरीदाबाद और गुरुग्राम के 5 नेताओं को किया निष्कासित, पूर्व विधायक भी शामिल

हरियाणा में कांग्रेस ने फरीदाबाद और गुरुग्राम के 5 नेताओं को किया निष्कासित, पूर्व विधायक भी शामिल

गुरुग्राम,27 फरवरी 2025 :  हरियाणा में आगामी नगर निगम चुनावों के बीच कांग्रेस पार्टी ने फरीदाबाद और गुरुग्राम के पांच नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इनमें पटौदी के पूर्व विधायक रामबीर सिंह भी शामिल हैं, जो कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी के कारण लंबे समय से विवादों में थे।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासन

कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण इन नेताओं को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। रामबीर सिंह, जो हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं, 15 फरवरी को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपनी बहू के लिए टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने पर्ल चौधरी को मैदान में उतारा। रामबीर सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में गुटबाजी और भेदभाव है, जिससे पार्टी की स्थिति खराब हो रही है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले प्रदेश अध्यक्ष के दामाद के नाम को आगे बढ़ाया, फिर स्थानीय उम्मीदवार को छोड़कर बिहार की बहू को टिकट थमा दी, जिससे पटौदी में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। अब, नगर परिषद चुनाव में भी प्रदेश अध्यक्ष की भतीजी को टिकट दी जा रही है, जिससे पार्टी में और गुस्सा और असंतोष फैल गया है।

कांग्रेस के 9 नेताओं का निष्कासन

यह कोई पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने पार्टी के नेताओं को निष्कासित किया हो। इससे पहले भी कांग्रेस ने 9 नेताओं को पार्टी से बाहर किया था। इनमें रादौर से पूर्व विधायक बिशन लाल सैनी और हिसार से विधानसभा चुनाव लड़ चुके रामनिवास राड़ा शामिल थे। रामनिवास राड़ा कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा के करीबी माने जाते हैं।

कांग्रेस पार्टी के भीतर उठ रहे विवाद और असंतोष ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, खासकर जब राज्य में नगर निगम चुनाव होने वाले हैं। यह निर्णय कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि पार्टी के भीतर के ये संघर्ष अब सार्वजनिक हो चुके हैं।

निष्कासन के बाद पार्टी की स्थिति

पार्टी से निष्कासित इन नेताओं के विरोध ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी को उजागर कर दिया है। पार्टी के इस फैसले से स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है, और कांग्रेस को आगामी चुनावों में नुकसान हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने यह कदम पार्टी की अनुशासन और एकता बनाए रखने के लिए उठाया है, लेकिन अब देखना यह होगा कि पार्टी के भीतर और बाहर इस फैसले का क्या असर होता है।

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