नई दिल्ली, 25 फरवरी: दिल्ली विधानसभा में आज पेश की गई Comptroller and Auditor General (CAG) रिपोर्ट ने दिल्ली की नई आबकारी नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में लागू की गई दिल्ली की आबकारी नीति के कारण राज्य सरकार को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया। यह रिपोर्ट 2017-18 से 2020-21 तक की अवधि का प्रदर्शन ऑडिट करती है और दिल्ली में शराब के विनियमन और आपूर्ति की प्रणाली की जांच करती है। यह रिपोर्ट उन लंबित 14 CAG रिपोर्टों में से एक है, जो पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल में पेश की जानी थीं।
रिपोर्ट में पाया गया कि दिल्ली आबकारी विभाग द्वारा शराब की आपूर्ति की निगरानी और विनियमन में कई विसंगतियां थीं। CAG के अनुसार, आबकारी विभाग ने दिल्ली आबकारी नियम, 2010 के तहत कई आवश्यकताओं की अनदेखी की, जैसे कि लाइसेंस जारी करते समय सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र, वित्तीय विवरण, और आपराधिक पूर्ववृत्त का सत्यापन। इसके अलावा, कई लाइसेंसधारियों के बीच सामान्य निदेशक का अस्तित्व पाया गया, जो नियमों का उल्लंघन था।
नई नीति के तहत समस्याएं
नई आबकारी नीति के तहत, एल1 लाइसेंसधारियों (निर्माता और थोक विक्रेता) को शराब की कीमत तय करने का विवेकाधिकार दिया गया था, जिससे शराब की कीमतों में अनावश्यक वृद्धि होने की संभावना थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह नीति शराब की कीमतों में हेरफेर के लिए एक बड़ा कारण बनी और कई राज्यों में एक ही उत्पाद के लिए विभिन्न मूल्य देखे गए।
CAG रिपोर्ट ने यह भी पाया कि गुणवत्ता नियंत्रण अपर्याप्त था। दिल्ली में शराब की आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई स्पष्ट परीक्षण रिपोर्ट और मानक नहीं थे, और कई नमूने बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों से मेल नहीं खाते थे। इससे यह सवाल उठता है कि क्या उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक गुणवत्ता की शराब मिल रही थी।
नियामक ढांचे में खामियां
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आबकारी विभाग का डेटा संग्रहण और विश्लेषणात्मक कार्य बहुत कमजोर था। विभाग के पास पर्याप्त या विश्लेषणात्मक डेटा नहीं था, जो नीति और प्रवर्तन कार्य में सुधार के लिए आवश्यक था। इसके अलावा, आबकारी खुफिया ब्यूरो (EIB) के निवारक उपायों के निष्पादन में भी खामियां पाई गईं, जिससे शराब की तस्करी और अवैध कारोबार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं किया जा सका।
अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर प्रभाव
इस रिपोर्ट के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि नई आबकारी नीति ने न केवल वित्तीय नुकसान किया बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और उपभोक्ताओं के लिए भी कई जोखिम पैदा किए। CAG ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि विभाग के कमजोर प्रवर्तन कार्यों ने शराब की अवैध बिक्री और तस्करी को बढ़ावा दिया।
यह रिपोर्ट दिल्ली के आबकारी विभाग के लिए एक बड़े अलार्म की तरह है, और अब दिल्ली सरकार को इस पर कार्रवाई करते हुए नई आबकारी नीति में सुधार करने की आवश्यकता है। CAG की इस रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार पर दबाव डाला है कि वह मामले की गहन जांच करवाए और सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी समस्याएं न उत्पन्न हों।