अंबाला,30 जनवरी : हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज एक बार फिर अधिकारियों के रवैये से नाराज हैं। अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने ग्रेवेन्स (शिकायत) कमेटी की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, विज ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन और आमरण अनशन करने तक की चेतावनी दे दी है।
अनिल विज, जिन्हें अक्सर उनकी बेबाकी और सख्त तेवरों के लिए जाना जाता है, इस बार अधिकारियों की लापरवाही और आदेशों की अनदेखी से खासे नाराज हैं। उन्होंने कहा, “अगर अधिकारियों को हमारी बात माननी ही नहीं है तो हम क्यों बैठक करें? मैं ग्रेवेन्स कमेटी की बैठक में नहीं जाऊंगा, क्योंकि मेरे आदेशों की पालना नहीं होती। अंबाला की जनता ने मुझे सात बार विधायक बनाया है। अगर उनके कामों के लिए आंदोलन करना पड़ा तो मैं करूंगा। अगर किसान नेता डल्लेवाल की तरह आमरण अनशन करना पड़ा, तो अनशन भी करूंगा।”
क्यों भड़के अनिल विज?
अनिल विज की नाराजगी का कारण अधिकारियों द्वारा उनके आदेशों का पालन न करना है। उनका कहना है कि जब जनता के हित में दिए गए उनके निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो ऐसी बैठकों में जाने का कोई फायदा नहीं है।
गौरतलब है कि अनिल विज इससे पहले भी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर चुके हैं। कई बार उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और उन्हें कड़ी चेतावनी दी है।
क्या आमरण अनशन करेंगे अनिल विज?
विज ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे और अधिकारियों ने जनता के कामों में लापरवाही जारी रखी, तो वह आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनशन का फैसला परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक हलकों में हलचल
अनिल विज के इस बयान से हरियाणा की राजनीति में हलचल मच गई है। उनकी चेतावनी से यह साफ है कि राज्य प्रशासन और अधिकारियों के साथ उनके संबंधों में तनाव बना हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और विज के इस कड़े रुख का क्या असर पड़ता है।