चंडीगढ़,23 जनवरी : हरियाणा में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार जल्द ही लाडो लक्ष्मी योजना शुरू कर सकती है। इस प्रस्ताव पर आज (23 जनवरी) को चंडीगढ़ में हो रही कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। योजना के तहत राज्य की 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को हर महीने ₹2100 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
यह योजना भाजपा के पिछले विधानसभा चुनावी संकल्प पत्र का हिस्सा थी, और अब इसे लागू करने की तैयारी हो रही है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
दिल्ली चुनाव पर भाजपा की नजर
दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस योजना पर फैसला भाजपा के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान होना है। हरियाणा की यह योजना भाजपा के लिए चुनाव प्रचार में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। पार्टी के नेता आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
AAP ने पंजाब में महिलाओं को ₹1000 प्रति महीने देने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया जा सका। वहीं, कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में ₹1500 प्रति महिला देने की घोषणा की थी, लेकिन इसमें शर्तें जोड़ दी गईं।
भाजपा की रणनीति
हरियाणा में लगातार तीन बार सरकार बना चुकी भाजपा अब दिल्ली में सत्ता हासिल करने की कोशिश में है। प्रदेश से 32 नेताओं को दिल्ली में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, सांसद नायब सैनी और अन्य मंत्री शामिल हैं।
भाजपा दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार को यमुना सफाई जैसे अधूरे वादों पर घेर रही है। अगर लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा में लागू होती है, तो भाजपा इसे दिल्ली में भी महिलाओं को लुभाने के लिए एक बड़ा वादा बना सकती है।
कैबिनेट मीटिंग में अन्य संभावित फैसले
कैबिनेट बैठक में राज्य के बजट सत्र की तारीख तय की जा सकती है। अनुमान है कि बजट सत्र फरवरी के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा कर सकती है।
इसके साथ ही, आठ नगर निगमों और 34 स्थानीय निकायों के चुनावों की तारीख पर भी निर्णय लिया जा सकता है। राज्य चुनाव आयोग को सिफारिश भेजने के बाद इन चुनावों को फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में करवाया जा सकता है।
लाडो लक्ष्मी योजना से जुड़े संभावित प्रभाव
इस योजना को लागू करने से हरियाणा सरकार पर हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, सरकार इसे महिलाओं के उत्थान और उनकी सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए एक बड़ी पहल मान रही है।