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“पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हृदय विदारक: ऊर्जा मंत्री अनिल विज

अंबाला, 27 दिसंबर: देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गुरुवार (26 दिसंबर) को नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में रात 9:51 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी बीमारियों के चलते उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

 

डॉ. सिंह के निधन पर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी का निधन दुर्भाग्यपूर्ण और हृदय विदारक है। मैं उनके निधन पर दुख व्यक्त करता हूं। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। प्रभु परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दें। उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी।”

 

राष्ट्रीय शोक की घोषणा

सरकार ने आज (27 दिसंबर) के सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और किसी भी प्रकार के आधिकारिक उत्सव या आयोजन नहीं होंगे। डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

 

डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक सफर

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। वे भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे और 2004 से 2014 तक लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुआ।

 

डॉ. सिंह को एक कुशल अर्थशास्त्री और ईमानदार राजनेता के रूप में याद किया जाएगा। 1991 में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू की, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली।

 

परिवार और योगदान

डॉ. मनमोहन सिंह अपने पीछे पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियों को छोड़ गए हैं। उन्हें उनकी सादगी, शालीनता और नीतियों के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

 

देशभर में शोक

 

उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक का माहौल है। विभिन्न नेताओं, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है। सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों की बाढ़ आ गई है।

 

डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान न केवल भारत की राजनीति में, बल्कि वैश्विक मंच पर भी सराहनीय रहा। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

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