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मंडी रैली में राहुल गांधी ने एक तीर से भेद दिए दो निशाने

चंडीगढ,7अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश के मंडी में शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विकास से विजय की ओर रैली को संबोधित कर एक तीर से दो निशाने भेद दिए। हिमाचल प्रदेश और गुजरात दोनों ही राज्य चुनाव के करीब है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में हिमाचल प्रदेश के विकास माॅडल को गुजरात से बेहतर बताते हुए दोनों राज्यों में ही पार्टी के लिए वोट मांग लिए। राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ही फिर मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि वीरभद्र सिंह सातवीं बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे।
 हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिलासपुर में भाजपा की ओर से आयोजित रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि हिमाचल प्रदेश की सरकार और पूरी पार्टी ही जमानत पर है। मोदी के बाद रााहुल गांधी के रैली को संबोधन के साथ दोनों ही दलों का चुनाव अभियान शुरू हो गया है।
राहुल गांधी ने कहा कि गुजरात में 13 हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए जबकि हिमाचल प्रदेश में 1500 स्कूल खोले गए है। हिमाचल में कांग्रेस सरकार ने चार साल में 70 हजार युवाओं को रोजगार दिया है जबकि गुजरात में मात्र दस हजार युवाओं को रोजगार दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में चार मेडिकल काॅलेज खोले गए हैं और गुजरात में एक भी नहीें। हिमाचल प्रदेश में सरकार बेरोजगारी भत्ता दे रही है लेकिन गुजरात में कुछ नहीं।
उन्होंने कहा कि आज देश के सामने बेरोजगारी बडी समस्या है। हर 24 घंटे में 30 हजार नए युवा रोजगार ढूढने निकलते है। हमारा चीन से मुकाबला है। चीन की सरकार सालाना 50 हजार युवाओं को रोजगार देती है जबकि मोदी सरकार सिर्फ 450 रोजगार देती है। मोदी ने सत्ता संभालते हुए कहा था कि हर साल दो करोड युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन यह वायदा कहीं पूरा होता नहीं दिखाई दिया। मोदी को तो सच व झूठ में अंतर नहीं दिखाई देता है।
 राहुल ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में किसान रोजाना आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की जा रही। मोदी ने रिजर्व बैंक की सहमति के बिना नोटबंदी लागू कर दी। इससे अर्थव्यवस्था को दो फीसदी का नुकसान हुआ है। गुजरात में 50 लाख बेरोजगार युवा मोदी की देन है। राहुल ने कहा कि मोदी ने पहले नोटबंदी व बाद में पांच स्लैब की जीएसटी से अर्थव्यवस्था को झटका दिया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने जीएसटी को अधिकतम 18फीसदी दर पर रखा था लेकिन मोदी सरकार ने अधिकतम दर 28फीसदी कर दी। छौटे व मझोले व्यापारी इतना अधिक कर नहीं चुका सकते।

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