दिल्ली ,27 फरवरी 2025 : केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 32 नेताओं से सुरक्षा वापस लेने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की समीक्षा समिति द्वारा 26 फरवरी 2025 को लिया गया। मंत्रालय का कहना है कि यह कदम सुरक्षा जरूरतों के आकलन के बाद उठाया गया है और यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे हर तीन महीने में लागू किया जाता है।
बीजेपी नेताओं से सुरक्षा क्यों हटाई गई?
गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के 32 बीजेपी नेताओं की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है, जिनमें कई पूर्व मंत्री और सांसद शामिल हैं। इस सूची में प्रमुख नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉन बारला, पूर्व सांसद दशरथ तिर्की, बीजेपी नेता शंकुदेव पांडा और पूर्व आईपीएस अधिकारी देबाशीष धर का नाम शामिल है। इसके अलावा, उन नेताओं का नाम भी है जो पिछले लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवारों से हार गए थे, जैसे कि डायमंड हार्बर के अभिजीत दास और पूर्व विधायक दीपक हलदर।
अभिजीत दास का बयान
डायमंड हार्बर से लोकसभा चुनाव हारने वाले बीजेपी उम्मीदवार अभिजीत दास ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं फिलहाल हरिद्वार में हूं और मुझे इस मामले में कोई सूचना नहीं मिली है। यह एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर तीन महीने में की जाती है। गृह मंत्रालय सुरक्षा के लिए सूची जारी करता है और फिर सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। पिछले 6.5 सालों में मैंने ऐसा कई बार देखा है।”
समिक भट्टाचार्य का बयान
बीजेपी सांसद और राज्य प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा, “यह एक नियमित प्रक्रिया है। केंद्र यह तय करता है कि किसे सुरक्षा की जरूरत है और उसी के अनुसार सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसमें कोई राजनीतिक कारण नहीं है। गृह मंत्रालय को लगता है कि कुछ नेताओं को सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।”
सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय एक नियमित सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है, जिसमें नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा आवश्यकताओं का आकलन किया जाता है। मंत्रालय समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था का पुनरावलोकन करता है और उसे आवश्यकतानुसार अपडेट करता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सुरक्षा जरूरतों का सही तरीके से मूल्यांकन करना और केवल उन व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करना है जिनके लिए यह जरूरी है।