नई दिल्ली,25 फरवरी : 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह सजा उस केस में दी गई है, जिसमें एक बाप-बेटे को जिंदा जलाने का आरोप सज्जन कुमार पर था। अदालत ने यह फैसला लंबी सुनवाई और सबूतों के आधार पर दिया।
सज्जन कुमार ने सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट में रियायत की अपील की थी। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि इस मामले में उन्हें फांसी की सजा देना उचित नहीं है। सज्जन कुमार ने कोर्ट से निवेदन करते हुए कहा, “मैं अब 80 साल का हो गया हूं और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा हूं। 2018 से मैं जेल में बंद हूं और अब तक मुझे किसी भी प्रकार की परोल या फरलो नहीं मिली है।”
अपनी सफाई में उन्होंने यह भी कहा कि 1984 के दंगों के बाद से वह किसी आपराधिक मामले में शामिल नहीं रहे हैं और न ही जेल में उनके खिलाफ कोई शिकायत मिली है। सज्जन कुमार ने यह भी उल्लेख किया कि जेल में उनका व्यवहार हमेशा सही रहा है और ट्रायल के दौरान भी किसी प्रकार की अनुशासनहीनता नहीं पाई गई। उन्होंने कहा कि वह सुधार की संभावना से इंकार नहीं कर सकते हैं।
सज्जन कुमार ने अपनी पूर्व सेवाओं का हवाला देते हुए कहा, “मैं तीन बार सांसद रहा हूं और सामाजिक कल्याण के कई प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहा हूं। मैं अब भी खुद को निर्दोष मानता हूं। इसलिए मैं अदालत से यह अनुरोध करता हूं कि वह मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम सजा तय करें।”
हालांकि, अदालत ने सज्जन कुमार की इन दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।