चंडीगढ़, 31 जनवरी – हरियाणा में वर्षों से नियमित होने की प्रतीक्षा कर रहे कच्चे कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में आदेश दिया है कि राज्य सरकार 2003 और 2011 की नीतियों के तहत पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को अगले छह महीनों के भीतर नियमित करे।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
जस्टिस जगमोहन बंसल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में दायर 151 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि 1996 की नीति के तहत किसी भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया जाएगा। लेकिन 2003 और 2011 की नीतियों के तहत योग्य कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
बकाया वेतन मिलेगा, लेकिन बिना ब्याज
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जो कर्मचारी इन नीतियों के तहत पात्र पाए जाते हैं, उन्हें कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख से बकाया वेतन दिया जाएगा। हालांकि, इस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो उसकी पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों की भी पुनर्समीक्षा की जाएगी।
किन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा लाभ?
फैसले में स्पष्ट किया गया है कि 2014 में नियुक्त किए गए कर्मचारियों को 2003 और 2011 की नीतियों के तहत कोई लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे कर्मचारियों पर 2024 में लागू नए अधिनियम के तहत विचार किया जाएगा। वहीं, 2014 की नीति की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आने के बाद ही इन कर्मचारियों के दावों पर पुनर्विचार किया जाएगा।
2014 की अधिसूचना पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 2014 की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट के 2006 के ‘उमा देवी फैसले’ के खिलाफ बताया। कोर्ट का मानना है कि यह अधिसूचना बिना किसी ठोस आधार के जारी की गई थी।
सरकार को निर्देश: पात्र कर्मचारियों के मामलों का जल्द करें निपटारा
कोर्ट ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि योग्य कर्मचारियों को उनके अधिकार से वंचित न किया जाए। सरकार को 2014 की अधिसूचना और पूर्व की नीतियों के तहत कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया गया है।
20-30 साल से इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों को राहत
हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों, नगर निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में कार्यरत हजारों कर्मचारी पिछले 20 से 30 सालों से अस्थायी, अनुबंधित या अंशकालिक रूप में सेवाएं दे रहे थे। हाईकोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या होगा आगे?
अब हरियाणा सरकार पर जिम्मेदारी है कि वह इस फैसले का पालन करते हुए छह महीने के भीतर पात्र कर्मचारियों को नियमित करे। यह फैसला हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से स्थायी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे थे।